बालतोड़ और फोड़ा में अंतर | Baaltod aur foda me antar

बालतोड़ (Boils/Furunculosis)

पर्यायवाची– फोड़ा, रोमकोप शोथ, बाल की जड़ में संक्रमण फुरंकल (Furuncle)

रोग परिचय

त्वचा और रोमकूप में ‘स्टेफाइलो कोक्कल’ संक्रमण होने पर रोमकूप के चारों ओर पूय मिश्रित सूजन आ जाने से रोगी को असहनीय पीड़ा (Pain) होती है और अन्त में द्रव के निकल जाने पर सूजन कम होकर दर्द कम हो जाता है इसे ही फोड़ा या बालतोड़ कहते हैं।

रोग के मुख्य कारण

• स्टेफाइलो कोक्कस अथवा अन्य जीवाणुओं के प्रकोप द्वारा।

• यह एक कीटाणु जन्य रोग है जो मक्खी मच्छरों के काटने से भी होता है।

• स्नान न करना/सफाई की कमी।

• गर्म व उत्तेजक पदार्थों का अधिक सेवन।

• ऐसे रोगी जो स्टेरॉयड ग्रुप की अथवा कैन्सर की दवा सेवन कर रहे हों।

• मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी। 

• यह रोग मोटे लोगों में अधिकतर पाया जाता है।

रोग के मुख्य लक्षण

• यह (बालतोड़) शरीर के किसी भी भाग पर जहाँ बाल (हेयर्स) होते हैं निकल सकता है।

• प्रभावित स्थान पर लाल रंग की सूजन आ जाती है, जिसको स्पर्श करने पर दर्द होता है। उसके मध्य में एक छोटा सा मुंह बना होता है। कुछ दिनों तक यह बढ़ता जाता है और दर्द भी अधिक होता है। कुछ दिनों के उपरान्त पक जाने पर इसमें पीप/मवाद (Pus) फोड़े में बने मुख द्वारा निकलने लगती है।

• यह (बालतोड़/फोड़ा) प्रायः हाथ-पैर, नितम्ब, बगलों तथा गर्दन के पीछे वाले भाग पर निकलते हैं।

• यदि समय पर समुचित चिकित्सा न की जाये तो यह फूटकर बार-बार बैठता रहता है तथा फिर से (पुनः) हो जाता है एवं आस-पास के रोमछिद्रों को भी प्रभावित करता है।

बालतोड़ के लिए घरेलू नुस्खे

• कुटकी और चिरायता प्रत्येक 5-5 ग्राम रात को पानी में भिगोकर रखें और सुबह के समय छानकर 15-20 मिली० की मात्रा में पिलायें। इसी प्रकार सुबह के समय भिगोकर रखें और शाम को पिला दें। बच्चों को चौथाई से आधी मात्रा में दें।

• शरफोंका मूल की छाल और पत्ते तथा नीम के सूखे पत्ते 5-5 ग्राम दोनों को पानी के साथ पीसकर लेप तैयार करें। इस लेप को फुन्सियों पर दिन में 3-5 बार लगायें तो फुन्सियाँ फूटकर घाव ठीक हो जाते हैं। जब तक घाव को पूरा आराम न हो जाये तब तक लेप लगाते रहें।

• उन्नाव (बनबेर) 200 ग्राम को रात को 400 मिली० पानी में भिगो दें। सुबह को जल को छानकर इसमें 1 किलो मिश्री मिलाकर शर्बत की चाशनी तैयार कर लें। इसे 25 ग्राम की मात्रा में अर्क उसवा या पानी मिलाकर सेवन करने से रक्त-विकृति जन्य शरीर के चकत्ते, फोड़े-फुंसियों में लाभ होता है।

• नीम की कोमल पत्ती को पानी मे उबालकर स्नान करने से भी फोड़ा नहीं होता है।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। नेचुरल वे क्योर इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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